विटामिन बी12 की कमी से हमारा दिमाग और Nervous system अच्छी तरह से काम नहीं करते, यहां तक कि शरीर में खून भी सही से नहीं बनता है।
पंकज गंगवार
उस दिन जब अपनी बेटियों को शहतूत पेड़ से तोड़कर खिलाना चाहा तो उन्होंने मना कर दिया कि डैडी हम अभी नहीं खाएंगे। मैंने पूछा क्यों तो उन्होंने कहा कि डैडी ये गंदे हैं। इन्हें तोड़ कर घर ले चलिए, वहां धोकर खाएंगे। लेकिन, मैं चाहता था कि वे इन्हें धोकर न खायें, लेकिन क्यों जानिए इस आलेख में।
हम सब अपने घर में बच्चों को यही सिखाते हैं कि बाजार से लाये गए फल और सब्जियों को अच्छे से धोकर ही प्रयोग करना चाहिए। आज के माहौल के हिसाब से यह सही भी है क्योंकि इतने अधिक कीटनाशक और रसायनों का प्रयोग किया जाता है अगर उन्हें धोया नहीं जाएगा तो कीटनाशकों के अंश भी हमारे शरीर के अंदर चले जाएंगे। लेकिन, मैं यहां आपको एक और बात बताने जा रहा हूं। आजकल अगर आप किसी का विटामिन का स्तर चेक कराएं तो सबसे ज्यादा कमी विटामिन डी और विटामिन B12 (Vitamin B12) की होती है। विटामिन डी के बारे में मैं पहले ही लिख चुका हूं, इसलिए आज विटामिन B12 की बात करेंगे। शाकाहारी लोगों को बताया जाता है की विटामिन बी12 शाकाहार में नहीं होता इसलिए ऐसे लोगों में इसकी कमी हो जाती है। विटामिन B12 के लिए डेयरी उत्पाद जैसे दूध- दही तथा अंडे या फिर मांस खाने के लिए कहा जाता है। लेकिन प्रश्न यह खड़ा होता है कि यदि शाकाहार में विटामिन B12 (Vitamin B12) नहीं है तो पशुओं के मांस में विटामिन बी12 कहां से आता है जो सिर्फ शाकाहार ही करते हैं और उसके बाद हमें दूध और मांस प्रदान करते हैं।
दरएअसल. प्रकृति में पाए जाने वाले कई प्रकार के बैक्टीरिया विटामिन B12 को बनाते हैं। ये वैक्टीरिया धूल, मिट्टी तथा नदियों और झरनों के पानी में पाए जाते हैं। ये बैक्टरिया कोबाल्ट नामक तत्व से मिलकर बी12 बनाते हैं। ये बैक्टीरिया हमारी व अन्य पशुओं की बड़ी आंत यानी कोलन में भी होते हैं और ये वहां भी बी12 बनाते हैं लेकिन वह बी12 हमारे शरीर मे अवशोषित नही हो पाता, मल के साथ बाहर निकल जाता है। विटामिन बी12 हमारी छोटी आंत में ही अवशोषित होकर हमें मिल सकता है। घास पर, फल-सब्जियों पर जो धूल-मिट्टी जमी होती है, उसमें भी बी12 पाया जाता है। पशु जब ऐसी घास को खाते हैं और प्राकृतिक स्रोत से पानी पीते हैं तो मिट्टी और पानी के साथ-साथ विटामिन B12 (Vitamin B12) भी उनके शरीर में पहुंच जाता है। जब हम दूध, मांस, अंडे आदि का प्रयोग करते हैं तो उनसे हमें भी बी12 मिल जाता है।
लेकिन, मांसाहारी लोग इस खुशफहमी में न रहें कि उनके शरीर में विटामिन B12 की कमी नहीं होगी क्योंकि आजकल पशुओं को भी कृत्रिम रूप से पाला जा रहा है और कृत्रिम वातावरण में रखा जाता है। उनको साफ पानी और चारा खाने को मिलता है। इस कारण उनमें भी विटामिन B12 की कमी हो जाती है। यदि पशुओं को कृत्रिम रूप से विटामिन बी12 दी जाती है तो उनको इसकी कमी नहीं होती है अन्यथा उनमें भी विटामिन B12 की कमी होने लगी है।
यदि हम शाकाहारी लोग फल-सब्जियों को उन पर लगी धूल के साथ खाएं तो विटामिन बी12 (Vitamin B12) हमारे पेट में भी पहुंच जाएगा जैसे कि पशुओं के शरीर में पहुंचता है। जब हम फल और सब्जियों को धोते हैं तो उसके साथ विटामिन बी12 भी धुल जाता है और हम उससे वंचित रह जाते हैं।
मैं यह नहीं कह रहा कि आप फल और सब्जियों को धोकर ना खाएं। आज के समय में ऐसा करना जरूरी है लेकिन मैंने आपको इसके पीछे का विज्ञान बता दिया। यदि आपको कोई ऐसा पौधा या पेड़ मिले जिस पर कभी कीटनाशक व अन्य रसायनों का प्रयोग न किया गया हो तो आप उससे तोड़े हुए फल या सब्जी को बिना धोये निसंकोच खा सकते हैं।
आप सोच रहे होंगे कि विटामिन B12 की कमी हो रही हो तो हो जाने दो पर यह बहुत महत्वपूर्ण विटामिन है। इसकी कमी के कारण हमारा दिमाग और तंत्रिका तंत्र (Nervous system) अच्छी तरह से काम नहीं करता, यहां तक कि हमारे शरीर में खून भी सही से नहीं बन पाता। शरीर मे सुन्नपन, सुई जैसी चुभन, स्मृति की कमी, डिप्रेसन, थकान, आलस्य आदि इसके लक्षण हैं। इसलिए इसका पूरा होना बहुत जरूरी है। यदि आपके शरीर में इस तरह के लक्षण हैं तो नियमित रूप से विटामिन B12 जरूर लें। इसको सप्लीमेंट फॉर्म में ले सकते हैं। यानी कि हमारी कंपनी के उत्पादों का सेवन कर सकते हैं।

((लेखक पोषण विज्ञान के गहन अध्येता होने के साथ ही न्यूट्रीकेयर बायो साइंस प्राइवेट लिमिटेड (न्यूट्री वर्ल्ड) के चेयरमैन भी हैं))
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