Fri. Apr 4th, 2025
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्यराष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य

National Chambal Gharial Wildlife Sanctuary: गम्भीर रूप से विलुप्तप्राय घड़ियाल, लालमुकुट कछुआ और विलुप्तप्राय गंगा सूंस की रक्षा के लिए इसे अभयारण्य घोषित किया गया है। यह चम्बल नदी पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के त्रिबिन्दु क्षेत्र पर सन् 1978 में स्थापित हुआ था और 5,400 वर्ग किलोमीटर विस्तारित है।

डॉ धीरेन्द शर्मा

प्रकृति का ऐसा खूबसूरत नजारा देखकर यह अनुमान कतई न लगाइए कि यह भारत से बाहर की किसी नदी या समन्दर का रेतीला तट (सी/रिवर बीच) है। यह मनमोहक दृश्य राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य (National Chambal Gharial Wildlife Sanctuary) का है। मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले के अटेर कस्बे के निकट चम्बल नदी (Chambal River) के मीलों लम्बे सुनसान तटों पर सोने-सी चमकती महीन रेत की 10-10 फीट मोटी परत वाली ऐसी तमाम जगहें हैं जहां पर्यटक दुनिया के किसी भी बेहतरीन सी-बीच की तरह घूमने और रेत परधूप स्नान का आनन्द ले सकते हैं। दुर्भाग्य से देश-दुनिया के लोगों को अब तक इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य

गम्भीर रूप से विलुप्तप्राय घड़ियाल, लालमुकुट कछुआ और विलुप्तप्राय गंगा सूंस की रक्षा के लिए इसे अभयारण्य घोषित किया गया है। यह चम्बल नदी पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के त्रिबिन्दु क्षेत्र पर सन् 1978 में स्थापित हुआ था और 5,400 वर्ग किलोमीटर विस्तारित है। अभयारण्य के भीतर चम्बल नदी अपने मूल प्राकृतिक रूप में बीहड़ खाइयों और पहाड़ियों से गुज़रती है और उसके कई रेतीले किनारों पर वन्यजीव पनपते हैं।

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राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य (National Chambal Gharial Wildlife Sanctuary) अपने अनूठे पारिस्थितिकी तन्त्र, पर्यावरण और वनस्पतियों के कारण 320 से ज्यादा दुर्लभ प्रजातियों के देसीएवं प्रवासी पक्षियों, डाल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं का आश्रय स्थल है।यह यूनेस्को की प्रस्तावित रामसर साइट भी है। आगरा से 70 किलोमीटर, भिण्ड से 30 किमी और ग्वालियर से 110 किमी का सड़क मार्ग से सफर करके यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग यहां पर्यटकों को घूमने के लिए सशुल्क मोटरबोट और ऊंट उपलब्ध कराता है।

राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य

क्या होता है रामसर स्थल ? (What is Ramsar site?)

-ऐसे आर्द्र भूमि क्षेत्र जो जैव विविधता के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, को रामसर सन्धि के तहत रामसर स्थल (Ramsar site) के रूप में सूचित किया जाता है, ताकि इनका संरक्षण किया जा सके।

-नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आर्द्रभूमि या वेटलैंड कहा जाता है। दरअसल, वेटलैंड्स ऐसे क्षेत्र हैं जहां भरपूर नमी पाई जाती है।

-आर्द्रभूमि जल को प्रदूषण से मुक्त करती है। यह वह क्षेत्र है जो वर्ष भर आंशिक रूप से या पूर्णतः जल से भरा रहता है।

-भारत में आर्द्रभूमि ठण्डे और शुष्क इलाकों से लेकर मध्य भारत के कटिबंधीय मानसूनी इलाकों और दक्षिण के नमी वाले इलाकों तक फैली हुई है।

राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य

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7 thought on “राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य : सोने-सी चमकती रेत वाला किनारा”
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