चेन्नाकेशव मन्दिर बेलुरु: होयसल वास्तुकला का रत्न
Chennakeshava Temple Beluru: होयसल वंश के राजा विष्णुवर्धन ने 1116 ईसवी में चोलों पर अपनी जीत के उपलक्ष्य में चेन्नाकेशव मन्दिर (Chennakesava Temple Beluru) का निर्माण करवाया था। माना जाता…
Chennakeshava Temple Beluru: होयसल वंश के राजा विष्णुवर्धन ने 1116 ईसवी में चोलों पर अपनी जीत के उपलक्ष्य में चेन्नाकेशव मन्दिर (Chennakesava Temple Beluru) का निर्माण करवाया था। माना जाता…
Shri Nageshwar Jyotirlinga: नागेश्वर मन्दिर विष और विष से सम्बन्धित रोगों से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। नागेश्वर शिवलिंग (Nageshwar Shivalinga) गोल काले पत्थर वाली द्वारका शिला पर त्रि-मुखी रुद्राक्ष…
Hoysaleshwara Temple : बारहवीं सदी के होयसलेश्वर मन्दिर को हेलीबीडु मन्दिर भी कहा जाता है और यह भगवान शिव को समर्पित है। इसका निर्माण होयसल साम्राज्य के अधिपति महाराजा विष्णुवर्धन…
त्र्यम्बकेश्वर मन्दिर काले पत्थरों से बना है। मंदिर का स्थापत्य अद्भुत है। इस प्राचीन मन्दिर का पुनर्निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी अर्थात नाना साहब पेशवा ने करवाया था। इसका जीर्णोद्धार वर्ष…
Omkareshwar: ओंकारेश्वर में दो ज्योतिस्वरूप लिंगों सहित 108 प्रभावशाली शिवलिंग हैं। स्कन्द पुराण, शिवपुराण और वायुपुराण में ओंकारेश्वर की महिमा का वर्णन है। हिन्दुओं में सभी तीर्थों के दर्शन के…
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस चामुण्डी पहाड़ी पर श्री चामुण्डेश्वरी मन्दिर स्थित है, उसी स्थान पर माता चामुण्डा ने महिषासुर का वध किया था। यह तीर्थ स्थान 18 महा शक्तिपीठों…
Lepakshi Temple : लेपाक्षी मंदिर के इष्टदेव भगवान शिव का क्रूर रूप वीरभद्र हैं। वीरभद्र महाराज दक्ष के यज्ञ के बाद अस्तित्व में आये थे। भले ही यह मन्दिर भगवान…
सुरकण्डा पहाड़ी (Surkanda Hill) टिहरी जनपद के पश्चिमी भाग में 2756 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सुरकण्डा मन्दिर के लिए जानी जाती है। यह मसूरी- चम्बा मोटर मार्ग पर पर्यटन…
इलायची दो प्रकार की होती है- हरी या छोटी और बड़ी इलायची। दोनों तरह की इलायचियों का उपयोग मसाले और मेडिसिन के लिए किया जाता है। जहां बड़ी इलायची व्यंजनों…
शुजी सेटोजाकी ने बताया, “हाल में देखा गया है कि ग्रीन टी में पाया जाने वाला पालीफिनाल इलास्टिन के पुनर्निमाण में मददगार है। यह एक जरूरी प्रोटीन है जो धमनियों…