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Month: April 2024

हजार स्तम्भ मन्दिर : तीन देवताओं को समर्पित त्रिकुटालयम

हजार स्तम्भ मन्दिर यह मन्दिर हनामकोण्डा पहाड़ी की ढलानों पर स्थित है। इसकी संरचना तारे के आकार की है। इस पर काकातीय के साथ ही चालुक्य वास्तुकला का प्रभाव स्पष्ट…

लाहौल-स्पीति : हिमाचल प्रदेश का ठंडा रेगिस्तान

भारत में कई ठंडे रेगिस्तान भी हैं। हिमाचल प्रदेश का लाहौल-स्पीति भी ऐसा ही सर्द रेगिस्तान है जहां साल में बमुश्किल ढाई सौ दिन ही धूप निकलती है। यहां बारिश…

राष्ट्रीय उद्यान : भारत में वन्यजीवों के अपने घर

इन राष्ट्रीय उद्यानों में हालांकि मानवीय गतिविधियों की इजाजात नहीं है लेकिन साल में कुछ महीने लोगों को यहां आकर वन्यजीवों को निर्भय होकर विचरते देखने का अवसर दिया जाता…

मेंढक मन्दिर : ओयल में रंग बदलते नर्मदेश्वर महादेव

हमारे सामने था वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण मेंढक मन्दिर जहां मण्डूक यानि मेंढक की पीठनुमा संरचना पर मस्तक उठाये खड़े विराट मन्दिर में विराजते हैं भगवान शिव। यहां का शिवलिंग…

म्यूलिंग वैली : इस सुन्दर-दुर्गम राह पर बनते गये रिश्ते

म्यूलिंग वैली की सुन्दरता आपको अन्दर तक विभोर कर देगी। टैंट वगैरह लगाने के बाद हम लोगों ने मैगी बनाकर बड़े मजे से खायी। वहां की सुन्दरता को निहारते और…

वैदिक घड़ी : जानिए क्या है वैदिक घड़ी और क्या हैं इसमें लिखे शब्दों के अर्थ

न्यूज हवेली लाइफ स्टाइल डेस्क भारत की सनातन संस्कृति और सभ्यता में अनेक महान ग्रंथों की रचना तथा अद्भुत वैज्ञानिक प्रयोग और सर्जनाएं हुई हैं। ऐसी ही एक अद्भुत और…

गंगटोक : मेहनतकश बादशाहों का शहर

गंगटोक का पुराना नाम है गन्तोक। तिब्बती भाषा के इस शब्द का अर्थ है पहाड़। सिक्किम का यह सबसे बड़ा शहर एक प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल के रूप में उभरा है।…

अमरनाथ : यहां शिव ने बताया अमरत्व का रहस्य

अमरनाथ यात्रा एक विशिष्ट अवधि के लिए होती है और आमतौर पर हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार स्कन्दस्थी के पावन दिन घोषित तिथि पर शुरू होती है और श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन)…

एस्ट्रो टूरिज्म : धरती से दूर ग्रह-नक्षत्रों की दुनिया

एस्ट्रो टूरिज्म के अनेक आकर्षण हैं। इनमें प्रमुख है मेटयोर शॉवर यानि अतिशबाजी के समान होने वाली उल्का वृष्टि। ऐसी उल्का वृष्टि हर साल कई बार होती है और यदि…

विरूपाक्ष मन्दिर : कुरूप आंखों वाले शिव का धाम

विरूपाक्ष मन्दिर को विक्रमादित्य द्वितीय की पत्नी रानी लोकमाह देवी ने बनवाया था। इसको बनाने के लिए ईंट और चूने का भी इस्तेमाल किया गया है। तुंगभद्रा के दक्षिणी किनारे…