Somnath Jyotirlinga : सोमनाथ मन्दिर (Somnath Temple) तीन प्रमुख भागों में विभाजित है- गर्भगृह, सभामण्डप और नृत्यमण्डप। इसका शिखर 150 फुट ऊंचा है। शिखर पर स्थित कलश का वजन 10 टन और ध्वजा 27 फुट ऊंची है। मन्दिर के केंद्रीय कक्ष को अष्टकोणीय शिव-यंत्र का आकार दिया गया है।
न्यूज हवेली नेटवर्क
पुराणों के अनुसार भगवान शिव जहां-जहां स्वयं प्रकट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) के रूप में पूजा जाता है। इनमें प्रथम स्थान है सोमनाथ का। गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में वेरावल बन्दरगाह के निकट स्थित सोमनाथ को आदि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान प्राप्त है। ऋग्वेद और पुराणों के अनुसार दक्ष प्रजापति ने चन्द्रदेव को क्षयग्रस्त होने का शाप दिया था। इस शाप से मुक्त होने के लिए चन्द्रदेव ने प्रभाष क्षेत्र में घोर तप किया। भगवान शिव की कृपा से शाप मुक्त होने के बाद चन्द्रदेव ने उनसे प्रर्थना की कि वे माता पार्वती के साथ सदा के लिए यहां विराजें। भगवान शिव ने उनकी प्रर्थना स्वीकार कर ली और ज्योतिर्लिंग रूप में अपनी पत्नी देवी पार्वती के साथ यहां रहने लगे। चन्द्रदेव के नाम पर यह ज्योतिर्लिंग सोमनाथ (Jyotirlinga Somnath) कहलाया। इसे सोमेश्वर भी कहा जाता है। सोमेश्वर का अर्थ है चन्द्र का स्वामी।
सोमनाथ मन्दिर (Somnath Temple) सनातन धर्म के उत्थान और पतन का साक्षी रहा है। अत्यन्त वैभवशाली होने के कारण आक्रन्ताओं ने कई बार इसको तोड़ा और लूटा लेकिन अस्थावान इसका पुनर्निर्माण करवाते रहे। भारत के स्वतंत्रता प्राप्त करने के पश्चात सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इस मन्दिर का पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराया। 11 मई 1951 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना की। सन् 1962 में मन्दिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।

सोमनाथ मन्दिर (Somnath Temple) तीन प्रमुख भागों में विभाजित है- गर्भगृह, सभामण्डप और नृत्यमण्डप। इसका शिखर 150 फुट ऊंचा है। शिखर पर स्थित कलश का वजन 10 टन और ध्वजा 27 फुट ऊंची है। मन्दिर के केंद्रीय कक्ष को अष्टकोणीय शिव-यंत्र का आकार दिया गया है।
सोमनाथ (Somnath) की महत्ता का अंदाज इस स्तुति से लगाया जा सकता है। कहा जाता है कि सिर्फ इस एक स्तुति का पाठ करके भी 12 ज्योतिर्लिंगों की उपासना की जा सकती है-
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम् ॥1॥
परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥
वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।
हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥
मन्दिर के गर्भगृह में अधिकृत पुजारियों को छोड़कर अन्य सभी का प्रवेश वर्जित है। सभी प्रकार के इलेक्ट्रिक-इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और गैजेट्स को ले जाने पर भी प्रतिबंध है। इन सभी उपकरणों को रखने के लिए मन्दिर ट्रस्ट की ओर से निशुल्क क्लॉक रूम बनाया गया है।
ऐसे पहुंचें सोमनाथ मन्दिर (How to reach Somnath Temple)
हवाई मार्ग : केशोड, राजकोट, अहमदाबाद, वड़ोदरा और दीव वेरावल के निकटतम हवाई अड्डे हैं। सोमनाथ मन्दिर से करीब 55 किलोमीटर दर स्थित केशोड के लिए मुम्बई से सीधी हवाई सेवा है। राजकोट एयरपोर्ट से सोमनाथ मन्दिर करीब 199 और दीव से 84 किलोमीटर दूर है।
रेल मार्ग : सोमनाथ मन्दिर (Somnath Temple) का निकटतम रेलवे स्टेशन वेरावल है जहां से यह मात्र सात किलोमीटर पड़ता है। राजकोट और अहमदाबाद से वेरावल के लिए कई ट्रेन मिलती हैं।
सड़क मार्ग : दिल्ली से सोमनाथ पहुंचने के लिए 1313 किमी का सफर तय करना होता है जबकि अहमदाबाद से यह 437 किमी पड़ता है। दीव, राजकोट, अहमदाबाद आदि से वेरावल के लिए बस, टैक्सी आदि मिलती हैं।
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