मिरिक (Mirik) नाम लेप्चा भाषा के दो शब्दों मिर और योक से बना है जिसका अर्थ है “आग से जली जगह”। लेकिन, अपने नाम के अर्थ के विपरीत यह अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य का धनी है। समुद्र की सतह से 1,767 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस शहर को भारत का “सबसे युवा हिल स्टेशन” कहा जाता है।
न्यूज हवेली नेटवर्क
कालिम्पोंग और सिलीगुड़ी के बाद हमारा अगला गन्तव्य था मिरिक (Mirik) । घुमावदार पहाड़ी सड़क पर दिलकश नजारे देखते हुए सिलीगुड़ी से यहां पहुंचने में हमें करीब दो घण्टे लगे। यहां पहुंच कर ही हमने जाना कि इस छोटे-से शहर को भले ही कालिम्पोंग, सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग की तरह प्रसिद्धी न मिली हो पर प्राकृतिक सौन्दर्य के मामले में यह भारत के किसी भी बड़े हिल स्टेशन से कम नहीं है। इसका यही अनछुआ सौन्दर्य यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को अपने मोहपाश में बांध लेता है।

मिरिक (Mirik) नाम लेप्चा भाषा के दो शब्दों मिर और योक से बना है जिसका अर्थ है “आग से जली जगह”। लेकिन, अपने नाम के अर्थ के विपरीत यह अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य का धनी है। समुद्र की सतह से 1,767 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस शहर को भारत का “सबसे युवा हिल स्टेशन” कहा जाता है। यहां के खूबसूरत पहाड़, हरी-भऱी घाटियां, झील, जंगल, रंगबिरंगे फूल, चाय और सन्तरों के बागान एवं शुद्ध जलवायु किसी का भी मन मोह सकती है। यहां सिंबिडियम ऑर्किड नामक एक विशिष्ट आर्किड के लिए सबसे अच्छी जलवायु है। यह दुनिया के सबसे कीमती ऑर्किड्स में से एक है। इस खास आर्किड के लिए यहां एक बगीचा भी विकसित किया गया है। इन्हीं सब विशेषताओं के चलते मिरिक (Mirik) धीरे-धीरे उत्तर बंगाल में सैलानियों का मनपसन्द गन्तव्य बनता जा रहा है। (Mirik: India’s youngest hill station rich in amazing natural beauty)
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मिरिक के प्रमुख दर्शनीय स्थल (Major tourist attractions in Mirik)
सुमेन्दु झील : मिरिक के इस प्रमुख पर्यटन आकर्षण को “मिरिक झील” भी कहा जाता है। यह मिरिक शहर के बिल्कुल केन्द्र में स्थित एक कृत्रिम जलाशय है जिसका निर्माण 1979 में मिरिक टूरिस्ट प्रोजेक्ट के तहत व्यावसायिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। सवा किलोमीटर लम्बी तथा तीन से 27 फुट तक गहरी इस झील की छटा मौसम पूरी तरह खुला होने और चांदनी रात में देखते ही बनती है। झील के चारों ओर ऊंचे-ऊंचे वृक्ष हैं जिनके बीच से पहाड़ों पर जाने के कई रास्ते हैं जिन पर आप ट्रैकिंग कर सकते हैं। यहां नौका की सवारी के अलावा झील के किनारे-किनारे चारों ओर घुडसवारी की भी सुविधा है।
रेनबो ब्रिज : इस चापाकार पुल को इन्द्रधनुष पुल भी कहते हैं जो सुमेन्दु झील पर बना हुआ है। इसे इसके नाम के अनुरूप ही खूबसूरत रंगों से सजाया गया है। रात को बिजली के रोशनी में इसकी शोभा देखते ही बनती है। पुल के दूसरी ओर ऊंचाई पर लगभग 10 मिनट चढ़ने के बाद छह−सात छोटे−छोटे मन्दिरों का समूह दिखता है। इसे “देवी स्थान” के नाम से जाना जाता है। यह फोटोग्राफी के लिए बहुत ही अच्छी जगह है।
बोकार नगेदोन चोखोर लिंग मठ :

रमेते दारा के रास्ते पर स्थित यह मठ बौद्ध धर्म के ध्यान केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है। इसकी स्थापना 1984 में क्याब्जे बोकार रिनपोछे द्वारा की गयी थी। तिब्बती शैली में बने इस मठ का मूल उद्देश्य एक छोटा रिट्रीट सेन्टर बनाना था लेकिन शिष्यों और आम लोगों के अनुरोध पर रिनपोछे ने भिक्षुओं को प्रशिक्षण देना भी शुरू कर दिया। बाद में यहां कई और निर्माण किए गये। मठ के करीब ही सूर्योदय और सूर्यास्त बिन्दु हैं।
डॉन बॉस्को चर्च :

यह दार्जिलिंग जिले का सबसे बड़ा रोमन कैथोलिक चर्च है। इसे रोमन कैथोलिक चर्च ऑफ मिरिक हैबल्कि भी कहते हैं और यह डॉन बॉस्को स्कूल के ठीक बगल में स्थित है। इसका भवन वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे शहर के ज्यादतर स्थानों से देखा जा सकता है। चर्च परिसर में इतालवी सेल्सियन मिशनरी फादर लुइगी जेलीसी की आदमकद प्रतिमा भी है।
बुनकुलुंग :

यह मिरिक का प्राकृतिक सुन्दरता से समृद्ध एक छोटा-सा गांव है। यहां के पहाड़ी ढलानों की सैर करना एक आनन्ददायक अनुभव होता है। यहां इको टूरिजम को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
रामीटेदारा : यह एक अत्यन्त लोकप्रिय व्यू पॉइन्ट है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त के भव्य दर्शन होते हैं जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। रामीटेदारा से आप मिरिक और आसपास के स्थानों के दिलकश नजारे देख सकते हैं। यहां के लिए मिरिक झील के पास से वाहन मिलते हैं। हालांकि ज्यादातर लोग ट्रैकिंग ही पसन्द करते हैं। मिरिक में इसके अलावा सीमाना व्यू पॉइन्ट, झुनझुनी व्यू पॉइन्ट, टिंगलिंग व्यू पॉइन्ट और सनराइज़ पॉइन्ट भी हैं।

चाय और सन्तरा बागान :

पहाड़ों के ढलानों पर बने सीढ़िनुमा हरेभरे चाय बागान मिरिक के सौन्दर्य को और बढ़ा देते हैं। शहर से कुछ ही दूरी पर सन्तरो के कई बड़े बागान हैं। सन्तरा फलने के दिनों में इनका सौन्दर्य देखते ही बनता है। पश्चिमी बंगाल में संतरों की सबसे ज्यादा पैदावार यहीं पर होती है।

मिरिक व इसके आसपास रमेते दारा, राय धाप, मंजुश्री पार्क, बुनकुलुंग मिरिक चर्च, दार्जिलिंग हिल्स बाइबिल स्कूल आदि भी घूमने और देखने योग्य स्थान हैं।
मिरिक जाने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit Mirik)
गर्मी का मौसम मिरिक की यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। इस दौरान यहां का अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहता है और आप आराम से घूम-फिर सकते हैं। यह पर्वतीय क्षेत्र है और सर्दी के मौसम में अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस मौसम में यहां जाने पर अपने साथ बढ़िया स्वेटर, जैकेट, श़ॉल, ऊनी टोपी, मफलर आदि जरूरी ले जायें। वर्षा के महीनों में भूस्खलन, रास्ता बन्द होने और फिसलन की समस्या हो सकती है। इसलिए जुलाई से सितम्बर के बीच यहां जाने का कार्यक्रम न बनाना ही उचित रहेगा।
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ऐसे पहुंचें मिरिक (how to go Mirik)
वायु मार्ग : निकटतम हवाईअड्डा बागडोगरा इण्टरनेशनल एयरपोर्ट यहां से करीब 48 किलोमीटर दूर है।
रेल मार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन सिलीगुड़ी जंक्शन यहां से करीब 49 किलोमीटर पड़ता है।
सड़क मार्ग : मिरिक सड़क मार्ग द्वारा दार्जिलिंग, खर्सियांग, सिलीगुड़ी, न्यू जलपाईगुड़ी आदि शहरों से जुड़ा हुआ है। सिलीगुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी के लिए देश के विभिन्न भागों से रेल एवं बस सेवा उपलब्ध है। मिरिक सिलीगुड़ी से लगभग 46 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जबकि दार्जीलिंग से करीब 39 किमी पड़ता है। कालिम्पोंग से वाया सिलिगुड़ी यहां तक पहुंचने के लिए करीब 112 किलोमीटर का सफर करनी पड़ता है।
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