Lonavala: लोनावला शब्द प्राकृत भाषा के दो शब्दों “लेन” और “अवली” से मिल कर बना है। लेन का अर्थ है पत्थरों को काट कर बनाया “आश्रय स्थल” जबकि अवली का अर्थ है “श्रृंखला”। अप्रैल से जून का बीच यहां का खुशनुमा मौसम मैदानी इलाकों की गर्मी से परेशान होकर आने वालों को राहत देता है।
न्यूज हवेली नेटवर्क
डेक्कन एक्सप्रेस खण्डाला से प्रातः 09:30 बजे रवाना हुई और ठीक आठ मिनट बाद हम लोनावाला (Lonavala) स्टेशन पर थे। बाहर आये तो गुनगुनी धूप के बीच सर्द हवा के हल्के झोंकों ने हमारा स्वागत किया। मुम्बई-पुणे राजमार्ग पर बसा लोनावाला (Lonavala) खण्डाला के बाद महाराष्ट्र का दूसरा सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशन है जहां घूमने और करने के लिए बहुतकुछ है। यहां की खूबसूरत झीलों, पहाड़ों, घाटियों, गुफाओं, जलप्रपात-झरनों, ऐतिहासिक किलों और मन्दिरों को देखते-घूमते चार दिन कब गुजर गये, पता ही नहीं चला। इस दौरान कितनी ट्रैकिंग की, इसका हिसाब लगा पाना मुश्किल है। (The joy of trekking amidst beautiful mountains and valleys)
लोनावला (Lonavala) शब्द प्राकृत भाषा के दो शब्दों “लेन” और “अवली” से मिल कर बना है। लेन का अर्थ है पत्थरों को काट कर बनाया “आश्रय स्थल” जबकि अवली का अर्थ है “श्रृंखला”। अप्रैल से जून का बीच यहां का खुशनुमा मौसम मैदानी इलाकों की गर्मी से परेशान होकर आने वालों को राहत देता है। मानसून के दौरान पूरा लोनावाला (Lonavala) मानो जीवन्त हो उठता है। इस दौरान चारों ओर हरियाली छा जाती है, पहाड़ी नदियां बलखाकर बहने लगती हैं तथा झरनों और प्रपातों का शोर किसी वाद्ययंत्र की ध्वनि की तरह कानों में रस घोलता है।

आज का लोनावाला कभी यादव वंश के शासकों के अधीन था। इसके सामरिक महत्व को देखते हुए मुगलों ने इस पर कब्जा कर लिया और यह लम्बे समय तक उनके अधीन रहा। बाद के दिनों में इसने मराठा और पेशवा साम्राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बॉम्बे प्रेजीडेंसी के तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड एल्फिंस्टोन ने 1871 में खण्डाला के साथ ही लोनावाला का बाकी दुनिया से परिचय कराया।
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आज के समय में यह एक लोकप्रिय हिल स्टेशन होने के साथ ही एडवेंचर के शौकीनों की पसन्दीदा जगहों में से एक है। घास के मैदानों, जंगलों, घाटियों और पहाड़ी दर्रों से होकर गुजरने वाले यहां के भीमाशंकर और लोहागढ़ किला ट्रैक बेहद खूबसूरत और लोकप्रिय हैं। राजमाची किले तक भी ट्रैकिंग कर पहुंचा जा सकता है। ट्रायंगल फोर्ट के नाम से मशहूर तिकोना किला अपने जोखिम भरे रास्तों और खूबसूरत नजारों के लिए जाना जाता है।
लोनावाला में घूमने योग्य स्थान (Places to visit in Lonavala)
टाइगर्स लीप :

इसे टाइगर पाइंट भी कहा जाता है। स्थानीय लोग इसे वाघदारी के नाम से जानते हैं जो दूर से एक छलांग लगाते हुए बाघ की तरह दिखता है। करीब 650 मीटर ऊंची इस पहाड़ी से हरी-भरी घाटियों, झीलों, प्रपात-झरनों का मनभावन नजारा दिखाई देता है। यहां के हरेभरे पहाड़ों के बीच मंडराते बादल लगातार नये-नये परिदृश्यों की सर्जना करते रहते हैं। बरसात के मौसम में तो यहां का नजारा अद्भुत होता है। मौसम साफ होने पर यहां से सूरज को उगते और डूबते हुए देखना एक अलग ही तरह का अनुभव है। यहां एक छोटा-सा बरसाती जलप्रपात भी है।
कार्ला और भाजा गुफाएं :

इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों के लिए कार्ला और भाजा गुफाएं इत्मीनान से घूमने की आदर्श जगह हैं। पत्थरों को काटकर बनाई गयी ये बौद्ध गुफाएं दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की हैं और एक-दूसरे से लगभग आठ किलोमीटर दूर हैं। कार्ला गुफाओं में अव्वल दर्जे की एकल गुफा के साथ-साथ भारत का सबसे बड़ा और सबसे पुराना चैत्य (मंदिर/प्रार्थना करने की जगह) है जिसके एक छोर पर एक स्तूप बना हुआ है। ये गुफाएं भारत में हीनयान बौद्ध सम्प्रदाय का सबसे बड़ा चैत्य हैं जिन्हें सातवाहन राजाओं ने बनवाया था। इन गुफाओं में दो हजार साल पुरानी लकड़ी की कुछ शहतीर (बीम) आज भी बरकरार हैं। यहा भगवान बुद्ध की उपदेश मुद्रा में एक मूर्ति है। भगवान बुद्ध को तीन हाथियों की बेहतरीन नक्काशी के साथ शेर के सहारे टिके हुए एक सिंहासन पर बैठे दिखाया गया है। इन गुफाओं तक पहुंचने के लिए खड़ी ढलान वाली पहाड़ी पर चढ़ाई करनी पड़ती है।
भाजा गांव से 400 फीट की ऊंचाई पर स्थित भाजा गुफाएं चट्टानों को काटकर तैयार की गयी 22 गुफाओं का समूह है। एक से अधिक स्तूप होने के कारण ये अपने आप में अनूठी हैं। इसका डिजाइन लगभग कार्ला के चैत्य गृह की तरह ही है जिसमें घोड़े की नाल के आकार के प्रवेश-द्वार के साथ-साथ भगवान बुद्ध की आकृति और मूर्तियां हैं। यहां की दीवार पर नक्काशी कर तबला वादन करती एक महिला को उकेरा गया है जो इस बात की पुष्ट करता है कि भारत में दो हजार साल पहले भी इस वाद्य-यन्त्र का उपयोग किया जाता था। कहा जाता है कि बौद्ध धर्म के अनुयाइयों ने यात्रियों के ठहरने के लिए चट्टानों को काटकर इन गुफाओं को बनवाया था। यहां कई विहार, स्तूप और चैत्य हैं।
भुशी बांध :

इन्द्रायणी नदी पर बना भुशी बांध लोनावाला और आईएनएस शिवाजी के बीच के पहाड़ी इलाके में स्थित है। यह लोनावाला के सबसे सुन्दर पर्यटन स्थलों में से एक है। इसके पास ही एक बेहद खूबसूरत जलप्रपात भी है। यह बांध पहाड़ियों से घिरा हुआ है और प्राकृतिक वाटर पार्क की तरह नजर आता है। इस बांध की सीढ़ियों के ऊपर से बहता हुआ पानी जब पथरीले इलाके से गुजरता है तो वह दृश्य अत्यन्त मनमोहक होता है। यहां की हरीभर वादियां, पक्षियों का चहचहाना और हल्का सर्द मौसम आपको अपने वश में कर लेगा। यहां तैरना प्रतिबन्धित है।
पावना झील:

पर्यटकों के बीच कैम्पिंग लोकेशन के तौर पर मशहूर पावना झील एक कृत्रिम जलाशय है। यहां हर तरफ प्रकृति के सुन्दर नजारे दिखते हैं और जलवायु आनन्दित कर देती है। भुशी बांध के विपरीत यहां कैनोइंग (डोंगी चलाने) और बोटिंग की सुविधा है। झील के आसपास ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। कैम्पिंग यहां की सबसे लोकप्रिय गतिविधि है और कई ट्रैवल ऑपरेटर इसके लिए पैकेज भी देते हैं। यहां का सूर्यास्त अत्यन्त मनमोहक होता है। मानसून का समय यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा है। इस दौरान झील में लबालब पानी होता है और हर तरफ हरियाली। लोहागढ़ किला, तिकोना किला और विसापुर किला इस झील के पास ही है।
तुन्गारली झील :

हरी-भरी वादियों के बीच सुकून के पल बिताने के लिए तुन्गारली झील एक आदर्श स्थान है। सन् 1930 के आसपास बनाये गए तुन्गारली बांध से इस झील को पानी मिलता है। यह बांध आसपास के हिल स्टेशनों के लिए भी पानी का एक बड़ा स्रोत है। पुणे और मुम्बई के लोगों के बीच यह एक लोकप्रिय वीकेंड स्पॉट जबकि स्थानीय लोगों का मनपन्द पिकनिक स्पॉट है। यहां आप कैम्पिंग करने के साथ ही ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। मानसून यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा समय है जब पूरी घाटी हरी-भरी हो जाती है। इस झील से राजमाची और लोहागढ़ किलों का बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई देता है।
शिरोटा झील :

हरेभरे पहाड़ों के बीच एक खूबसूरत घाटी में बनी यह झील लोनावाल से करीब 18 किलोमीटर दूर है। प्राकृतिक सुन्दरता के मायने समझने हों तो यहां अवश्य जायें।
कुणे जलप्रपात :

कुणे जलप्रपात महाराष्ट्र के सबसे सुन्दर प्रपातों में से एक है। यह तीन स्तरों वाला प्रपात है जहां पानी 200 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिरता है। हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित इस प्रपात का सौन्दर्य बरसात के मौसम में निखार पर होता है और यहां पर्यटक उमड़ पड़ते हैं। यहां आप अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने के साथ ही ठण्डे पानी में डुबकी भी लगा सकते हैं। यहां जिपलाइनिंग और रैपलिंग जैसी एडवेंचर गतिविधियों में भी शामिल हो सकते हैं।
ड्यूक्स नोज :

यह लोनावाला (Lonavala) में घूमने-फिरने की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। यहां से खण्डाला घाट का बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। इस जगह का नाम ड्यूक ऑफ वेलिंगटन के नाम पर पड़ा है। स्थानीय लोग इसे नागफनी कहते हैं जिसका मतलब है नाग का फन। यह स्थान खूबसूरत लोकेशन, शान्त वातावरण और सुन्दर हरी-भरी वादियों के नजारे के लिए जाना जाता है। चट्टानी इलाके और घने जंगल से होकर गुजरने वाले लम्बे, संकरे रास्ते की वजह से यह स्थान ट्रैकिंग, हाइकिंग और रॉक क्लाइम्बिंग के लिए बेहद लोकप्रिय है।
राजमाची किला :

समुद्र तल से 2,710 फीट की ऊंचाई पर बने इस किले से सह्याद्रि पहाड़ियों और शिरोटा बांध का नजारा देखने लायक होता है। यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज, बादशाह औरंगजेब, शाहूजी महाराज और ब्रिटिश शासन सहित कई साम्राज्यों का गवाह रहा है। किले में स्थित बालेकिल्ला यानी जुड़वां किले श्रीवर्धन और मनरंजन यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र हैं। आसपास के इलाकों पर नजर रखने के लिए इनका निर्माण किया गया था। इस किले में कुछ गुफाएं और काल भैरव मन्दिर समेत कई पूजास्थल हैं। इनमें से कुछ मन्दिर इस किले से भी ज्यादा पुराने हैं। किले के चारों तरफ हरे-भरे नजारे दिखाई देते हैं। लोनावाला और कर्जत के बीच के रास्ते को ही राजमाची ट्रैक कहा जाता है। इस किले तक जाने के दो रास्ते हैं। लोनावाला से ट्रैक के जरिए करीब 15 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है जबकि कर्जत से यहां तक पहुंचने के लिए लगभग पांच किमी की चढ़ाई है। उधेवाड़ी गांव से जुड़े हुए कर्जत ट्रैक की खड़ी चढ़ाई काफी कठिन मानी जाती है।
लोहागढ़ किला :

लोनावला से करीब 11 किमी दूर स्थित इस किले में मराठा साम्राज्य की सम्पत्ति रखी जाती थी। कहा जाता है कि सूरत से लूटी गयी बेशकीमती वस्तुओं को भी यहीं रखा गया था। यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल यह किला समुद्र तल से लगभग 1,050 मीटर की ऊंचाई पर है। इसके चार प्रवेश द्वार हैं- हनुमा दरवाजा, गणेश दरवाजा, नारायण दरवाजा और महा दरवाजा। सन् 1648 में छत्रपति शिवाजी ने इस किले पर विजय प्राप्त कर अपने कब्जे में कर लिया था लेकिन वर्ष 1665 में पुरन्दर सन्धि के तहत यह मुगलों के कब्जे में आ गया। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहां की यात्रा के लिए अच्छा माना जाता है।
विसापुर किला : खण्डहर हो चुका यह किला आम पर्यटकों से ज्यादा ट्रैकर्स से गुलजार रहता है। किले तक पहुंचने के लिए तीन तरफ जंगल से घिरे सुन्दर ट्रैक हैं। पत्थर और चूने से बने इस किले का निर्माण बालाजी विश्वनाथ ने 1713 में शुरू कराया था और यह 1720 में बनकर तैयार हुआ ।
नारायणी धाम मन्दिर :

लोनावाला (Lonavala) के बीचों-बीच स्थित है यह मन्दिर यहां के सर्वाधिक दर्शनीय स्थलों में से एक है। मां नारायणी को समर्पित इस मन्दिर को बनाने के लिए सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। इस चार मंजिला मन्दिर में भगवान गणेश और हनुमान के अलावा और भी कई देवताओं की मूर्तियां हैं। चार एकड़ के परिसर में स्थित इस मन्दिर का निर्माण 2002 में हुआ था। इसका अहाता भी अत्यन्त सुन्दर है जिसमें बगीचा और फव्वारे हैं। मुख्य द्वार से अन्दर प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को ऐसा नजारा दिखता है कि वे मुग्ध हो जाते हैं।
सेलिब्रिटी वैक्स म्यूजियम : टोल प्लाजा के पास वारसोली रेलवे स्टेशन से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित इस वैक्स म्यूजियम में देश-विदेश की मशहूर हस्तियों की लगभग 100 आदमकद मूर्तियां हैं। इसे सुनील सेलिब्रिटी वैक्स म्यूजियम के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल इस संग्रहालय की स्थापना सुनील कण्डलूर ने की थी जो मोम की मूर्तिया बनाने वाले एक विश्व प्रसिद्ध कलाकार हैं। यहां आपको स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधी, भीमराव अम्बेडकर, कपिल देव, विराट कोहली, चार्ली चैपलिन, नरेन्द्र मोदी, सद्दाम हुसैन, छत्रपति शिवाजी महाराज आदि की जीवन्त मूर्तिया देखने को मिलेंगी।
सॉससच हिल्स : यह घने पेड़ों से घिरा हुआ एक पहाड़ है जहां विभिन्न प्रजातियों के हजारों पक्षी देखने को मिलते हैं। यहां पर तमाम लोग रॉक क्लाइम्बिंग और ट्रैकिंग करते दिख जायेंगे।
केवल्यधाम आश्रम : यह आश्रम आधुनिक विज्ञान और योग के फ्यूजन के लिए प्रसिद्ध है। यहां नेचुरल थेरेपी इंस्टिट्यूट भी है जहां योग की कुछ अनोखी यूनिक टेक्निक का प्रयोग होता है। इसके पुस्तकालय में 25 हजार से ज्यादा पुस्तकें हैं।
डेल्ला एडवेंचर पार्क :

यह एडवेंचर पार्क एक बेहद खूबसूरत घाटी में है। यहां तीरंदाजी, रॉकेट इजेक्टर, स्वूप स्विंग (लगभग 100 फीट ऊंचा), जोरबिंग, फ्लाइंग फॉक्स, मोटोक्रॉस, डर्ट बाइक राइडिंग, बग्गी राइड, पेंटबॉल और रैपलिंग का आनन्द ले सकते हैं।
आयुडोली : लोनावाला में यह घुड़सवारी करने का सबसे अच्छा स्थान है। यहां पर घुड़सवारी की कई तरह की गतिविधियां होती है जैसे हॉर्स राइडिंग, जंगल ट्रैक, नेचर वॉक, रॉक क्लाइम्बिंग आदि।
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ऐसे पहुंचें लोनावाला (How to reach Lonavala)
वायु मार्ग : मुम्बई का छत्रपति शिवाजी महाराज इण्टरनेशनल एयरपोर्ट यहां से करीब 87 जबकि पुणे इण्टरनेशनल एयरपोर्ट लगभग 74 किलोमीटर दूर है।
रेल मार्ग : लोनावाला (Lonavala) पुणे और मुम्बई रेलमार्ग पर एक प्रमुख स्टेशन है। मुंबई-पुणे के बीच चलने वाली लगभग सारी ट्रेन यहां रुकती हैं।
सड़क मार्ग : मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे और मुम्बई-पुणे राष्ट्रीय राजमार्ग, दोनों ही लोनावाल से गुजरते हैं। यहां से पुणे करीब 65 किमी जबकि मुम्बई लगभग 82 किमी है। इन दोनों महानगरों से लोनावाला के लिए हर तरह की बस और टैक्सी मिलती हैं।

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