Bhimashankar Jyotirling: वास्तुकला की नगाड़ा शैली में बनाया गया भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मन्दिर श्रद्धालुओं के लिए प्रातः पांच बजे से रात्रि के 9:30 बजे तक खुला रहता हैं। सोमवार के प्रदोषम, अमावस्या, ग्रहण, महाशिवरात्रि के दौरान दर्शन नहीं कराये जाते। श्रावण और कार्तिक के दौरान मुकुट और श्रृंगार दर्शन भी नहीं कराये जाते।
न्यूज हवेली नेटवर्क
तीन ज्योतिर्लिंगों की पावन धरती महाराष्ट्र में पुणे से करीब 100 किलोमीटर दूर सह्याद्रि पर्वत पर स्थित शिराधन गांव में विराजते हैं श्री भीमाशंकर महादेव (Shri Bhimashankar Mahadev)। समुद्र तल से 3,250 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मन्दिर का शिवलिंग काफी बड़ा और मोटा है। इसलिए इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। भीमा नदी का उद्गम यहीं पर है जो दक्षिण पश्चिम दिशा में बहती हुई रायचूर जिले में कृष्णा नदी से जा मिलती है। पुराणों में वर्णित है कि जो भी भक्त प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद 12 ज्योतिर्लिगों का नाम जापते हुए इस मन्दिर के दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर होते हैं और उसके लिए स्वर्ग का मार्ग खुल जाता है।
शिव महापुराण के अनुसार रावण के भाई कुम्भकर्ण का पुत्र भीम ब्रह्मा से वरदान पाकर अहंकारी और उन्मत्त हो गया। वह भगवान राम का वध करना चाहता था और पिता का मृत्यु का बदला लेने के लिए मनुष्यों के साथ-साथ देवताओं को भी सताने लगा। उसने पूजन-यज्ञ भी बंद करा दिये। इससे त्रस्त देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे। शिवजी ने भीम से युद्ध करने का निर्णय लिया। इस युद्ध में शिवजी ने भीम को हराकर राख कर दिया। उसके अंत के साथ ही सभी देवताओं ने शिवजी की स्तुति कर उनसे आग्रह किया कि वे शिवलिंग के रूप में इसी स्थान पर विराजित रहें। महादेव ने इस प्रार्थना को स्वीकार किया और भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (Bhimashankar Jyotirlinga) के रूप में यहां विराजित हुए।

वास्तुकला की नगाड़ा शैली में बनाया गया भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (Bhimashankar Jyotirlinga) मन्दिर श्रद्धालुओं के लिए प्रातः पांच बजे से रात्रि के 9:30 बजे तक खुला रहता हैं। सोमवार के प्रदोषम, अमावस्या, ग्रहण, महाशिवरात्रि के दौरान दर्शन नहीं कराये जाते। श्रावण और कार्तिक के दौरान मुकुट और श्रृंगार दर्शन भी नहीं कराये जाते। छत्रपति शिवाजी महाराज यहां दर्शन-पूजन के लिए आते रहते थे। वर्तमान मन्दिर का निर्माण उन्हीं के द्वारा करवाया गया था।
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (Bhimashankar Jyotirlinga) के दर्शन के लिए श्रद्धालु पूरे वर्ष पहुंचते हैं। हालांकि यहां आने का सबसे उचित समय अक्टूबर से फरवरी के मध्य का होता है। इन दिनों यहां का दृश्य अलौकिक और सह्याद्री पर्वत का वातावरण सुहाना होता है। बरसात के बाद हर तरफ हरियाली छा जाती है। हल्की सर्दी में सड़क मार्ग से सफ़र करने का अलग ही आनन्द मिलता है।
ऐसे पहुंचें भीमाशंकर मन्दिर (How to reach Bhimashankar Temple)
हवाई मार्ग : भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (Bhimashankar Jyotirlinga) का निकटतम हवाई अड्डा पुणे हवाई एयरपोर्ट है जो यहां से करीब लगभग 109 किलोमीटर है।
रेल मार्ग : भीमाशंकर मन्दिर का निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन पुणे है जो यहां से करीब लगभग 111 किलोमीटर पड़ता है। यह देश के सभी प्रमुख शहरों से नियमित रेल सेवा द्वारा जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग : भीमाशंकर मन्दिर (भीमाशंकर मन्दिर) मुम्बई से करीब 223, नाशिक से 205, सालगांव से 42, भोरवाड़ी से 61, पेठ से 63, राजूर से 67, उत्चिल से 68, जुन्नार से 69, कोलेवाड़ी से 90, कासगांव से 131 और मुरबाद से 150 किलोमीटर दूर है। इन सभी स्थानों से यहां के लिए राज्य सड़क परिवहन निगम के साथ ही निजी कंपनियों के बस और टैक्सियां मिल जाती हैं।
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