Wed. Feb 4th, 2026

Author: Gajendra Tripathi

न्याय के दरबार से पाताल भुवनेश्वर तक वाया हाट कालिका

उत्तराखण्ड के देव-दरबार केवल देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए ही नहीं, अपितु न्याय के लिए भी जाने जाते हैं। सबसे पहले हम जिला मुख्यालय अल्मोड़ा से आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़…

प्रकृति की गोद : सुयालबाड़ी का शानदार ढोकाने जलप्रपात

तकरीबन 30 किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद नैनीताल जिले में बसा एक खूबसूरत गांव आया सुयालबाड़ी जिसकी गोद में थी हमारेी आज की दिन की मन्जिल यानी ढोकाने…

अल्मोड़ा : कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी की न भूलने वाली यादें

अल्मोड़ा शहर समुद्र की सतह से 1,642 मीटर की ऊंचाई पर एक उल्टे रखे कटोरे के आकार वाली पहाड़ी (कश्यप पर्वत) पर बसा है। कौशिका (कोसी) और शाल्मली (सुयाल) नदियां…

करणी माता मन्दिर : यहां निश्चिन्त होकर घूमते हैं हजारों चूहे

वास्तुकला की इण्डो इस्लामिक (मुस्लिम-राजपूत) शैली पर आधारित करणी माता मन्दिर का निर्माण बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। मन्दिर के सामने के दरवाजे चांदी के हैं। छत्र…

त्रिउण्ड पर्वत पर ट्रैकिंग : “साइकिल बाबा” से “ट्रायण्ड बाबा” बनने की यात्रा!

मशहूर घुमक्कड़ और पर्यावरण एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजीव जिन्दल उर्फ “साइकिल बाबा” अपनी आदत के अनुसार एक बार फिर पिट्ठू बैग लेकर घर से निकल लिये और पहुंच गये हिमाचल…

प्रकृति का अद्वैतवाद : शहर से उकता चुके मन को शांति देने वाली यात्रा

रास्ते में तेज हवा के बीच स्कूटी के साथ आगे बढ़ना काफी मुश्किल हो रहा था पर अन्दर की जिद रास्ता आसान किए हुए थी और इसी तरह का सफर…

एबॉट माउण्ट : चम्पावत में भुतहा स्थान पर जन्मदिन का उत्सव

अब बारी थी सालगिरह वाले दिन की जिसे गुजारने के लिए हमने चुनी अपनी रुचि के मुताबिक आसपास की सबसे शान्त और खूबसूरत जगह एबॉट माउन्ट। यह सुरम्य स्थान उत्तराखण्ड…

एलीफेन्ट वाटरफाल्स : तीन चरणों वाला जलप्रपात

हाथी जलप्रपात तक पहुंचने के लिए 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं जिन पर प्रायः हल्की फिसलन होती है। हालांकि बैठने और आराम करने के लिए कुछ बेंच बनाई गयी हैं।…

लोहाघाट के बलना में अपनी जड़ों की खोज

लोहाघाट से लगभग 12 किलोमीटर दूर दिगाली चौड़ होते हुए हम अखिलतरणी मन्दिर पहुंचे। यहां दर्शन-पूजन के पश्चात काली-गांव, किमतोली, काफली और पटोली होते हुए पहुंच गये मेरे गांव बलना।…

लोहाघाट : उत्तराखण्ड की धरती पर “कश्मीर”

साथी फोटो जर्नलिस्ट ने अपने शहर की राह पकड़ी और मैंने अपनी मोटरसाइकिल लोहाघाट की ओर दौड़ा दी। करीब पौने दो घण्टे बाद मैं समुद्र की सतह से 1788 मीटर…