सज्जनगढ़ दुर्गः एक किला जिसे कहते हैं महल
महाराणा सज्ज्न सिंह का इरादा यहां मूल रूप से एक खगोलीय केन्द्र के रूप में नौ मंजिला परिसर का निर्माण करना था जहां से मानसून की गति और उसकी सूक्ष्म…
महाराणा सज्ज्न सिंह का इरादा यहां मूल रूप से एक खगोलीय केन्द्र के रूप में नौ मंजिला परिसर का निर्माण करना था जहां से मानसून की गति और उसकी सूक्ष्म…
चित्तूर शहर व इसके आसपास का क्षेत्र अपनी खूबसूरत पहाड़ियों, घाटियों, जल प्रपातों, वन सम्पदा और जैव विधता, किलों एवं मन्दिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के प्राकृतिक दृश्य मन…
दीमापुर नागालैण्ड का सबसे बड़ा शहर और वाणिज्यक केन्द्र है। इसके पूर्वी भाग में धनसिरी नदी है, दूसरी तरफ वन और घास के मैदान हैं। यहां पहाड़, घाटियां, जैव विविधता…
हुण्डरू जलप्रपात (Hundru Falls) के शीर्ष से नीचे उतरने के लिए करीब साढ़े सात सौ सीढ़ियां हैं। लगभग 100 मीटर गहरी खाई से ऊपर की ओर देखने पर लगता है…
शीतकाल के दौरान चिल्का झील (Chilka Lake) भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसके साथ ही यह कई प्रकार की दुर्लभ वनस्पतियों और…
समुद्र की सतह से 823 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी दर्रे पर स्थित अगुम्बे (Agumbe) कर्नाटक के मैदानी इलाकों को तटीय क्षेत्र से जोड़ता है। यहां हरे-भरे जंगल, बलखाती…
पश्चिमी घाट के पहाड़ों पर घने जंगलों से घिरा दाण्डेली वन्यजीव अभयारण्य (Dandeli Wildlife Sanctuary) अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां आम, जामुन, हिरदा, बेहड़ा, बांस,…
तुएनसांग शहर की स्थापना 1947 में की गयी थी और इसका नाम पास ही में स्थित ट्वेनसांग गांव के नाम पर रखा गया। नागालैण्ड का सबसे ऊंचा पहाड़ सारामाती इसके…
चांदीपुर बीच (Chandipur Beach) इसलिए भी खास है क्योंकि यहां दिन में एक नहीं बल्कि दो बार समुद्र के पीछे चले जाने के अद्भुत नजारे को देखा और कैमरे में…
न्यूज हवेली नेटवर्क समुद्र के कांच जैसे पारदर्शी पानी और तट की चांदी जैसी चमकती रेत पर डूबते सूरज की बिखरी किरणों ने सुनहरा रंग भरना शुरू कर दिया और…