Fri. Apr 4th, 2025
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नागालैण्ड का कोई भी उत्सव मांस के व्यंजनों के बिना पूरा नहीं होता हैबुशमीट यानी कुत्ते का मांस यहां की थाली का महत्वपूर्ण व्यंजन है।

न्यूज हवेली लाइफ स्टाइल डेस्क

भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में बसा नागालैण्ड अपने प्राकृतिक सौन्दर्य और मांसाहारी व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। इस जनजातीय राज्य में जंगल, पहाड़ और चावल के खेत ही प्रमुख हैं। इस कारण यहां का खान-पान भी इन्हीं पर आधारित है। यहां का मुख्य भोजन चावल और मांस है जो अपनी अनूठी विविधता और स्वाद के लिए जाना जाता है। लोग जितने चाव से मसालेदार भोजन करते हैं, उतना ही चटखारे लेकर उबली हुई सब्जियां भी खाते हैं। (Food of Nagaland)

नागालैण्ड में अब तक 16 जानजातियों और उपजातियों की पहचान की गयी है। राज्य में सालभऱ त्योहार-उत्सवों का सिलसिला चलता रहता है और कोई भी उत्सव मांस के व्यंजनों के बिना पूरा नहीं होता है। चूंकि आदिमकाल से ही यहां के लोग शिकारी रहे हैं, इसलिए जंगली जानवरों के मांस को ज्यादा महत्व दिया जाता है।

nagaland thali
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यहां की लोककथाओं में बाघ और तेंदुए को भाई का दर्जा दिया गया है, इस कारण इन दोनों का शिकार नहीं किया जाता। इन दोनों के अलावा यहां के लोग सुअर, हिरण, मिथुन, भैंसा, बन्दर समेत हर तरह के जानवरों का मांस खाते हैं। जिस तरह चिकन और मटन उत्तर और मध्य भारत के मांसाहारी लोगों की थाली का अहम हिस्सा रहे हैं, ठीक उसी प्रकार बुशमीट यानी कुत्ते का मांस यहां की थाली का महत्वपूर्ण व्यंजन है। (Dishes of Nagaland)

नागालैण्ड के प्रमुख पकवान (Main dishes of Nagaland)

समथू :

समथू
समथू

मूल रूप से यह सेमा और सुमी जनजातियों की डिश है लेकिन अब पूरे राज्य की सिग्नेचर डिश बन चुकी है। समथू को तैयार करने के लिए सबसे पहले स्मोक्ड पोर्क में एक्सोन का इस्तेमाल किया जाता है और सामन्थु नामक मिर्च का पाउडर मिलाकर गाढ़ी करी में पकाया जाता है। राज्य सरकार ने इसे “फेमस फूड ऑफ नागालैण्ड” में शामिल किया है।

एकिबे :

एकिबे
एकिबे

यह बहुत ही मसालेदार और स्वदिष्ट व्यंजन है। इसे मुख्य रूप से सरसों की पत्ती और कोलोकेशिया (अरबी) की जड़ों से तैयार किया जाता है। ऐकिबे को तैयार करने के लिए सरसों की पत्तियों और कोलोकेशिया की जड़ों को सिर्फ नमक डालकर पकाया जाता है ताकि इन दोनों के स्वाद और सुगन्ध एक-दूसरे के साथ अच्छी तरह मिल जायें। इसके बाद इसमें कई तरह के सूखे और ताजा मसाले मिलाये जाते हैं। यह नागालैण्ड की मांसाहारी थाली की एक महत्वपूर्ण डिश है।

अकिनी चोकिबो :

अकिनी चोकिबो
अकिनी चोकिबो

इसे बनाने के लिए पेरीला बीजों को भूनने के बाद पीसा जाता है। फिर इसे धान के खेतों में मिलने वाले घोंघे के साथ पकाया जाता है। पक जाने पर इसमें सूअर के मांस और एक्सोन से थोड़ी सी चरबी भी मिलाई जाती हैं जो इसके स्वाद को और बढ़ा देते हैं। नागालैण्ड जाने पर इस चटपटी डिश का स्वाद लेना न भूलें।

बांस में पकी मछली :

बांस में पकी मछली
बांस में पकी मछली

यह नागालैण्ड के सबसे अनोखे और स्वादिष्ट व्यंजनों में से एक है। इसे बनाने के लिए मछली और मसालों को बांस की नलियों में भर दिया जाता है। फिर उसे आग में रखकर पकाते हैं। इससे बांस का स्वाद और सुगन्ध भी मछली में समा जाती है जो इसे सबसे अलग और यूनिक बनाते हैं।

बुशमीट :

बुशमीट
बुशमीट

कुत्ते का मांस या बुशमीट नागा जनजातियों का परम्परागत भोजन है। हालंकि राज्य सरकार ने अब कुत्तों का शिकार करने पर रोक दी है पर इसका बुशमीट की उपलब्धता और खपत पर कोई असर नजर नहीं आता है। इसे बनाने कि लिए कुत्ते की चमड़ी उतारने के बाद उसे समूचा ही उबाल या आग में भून लेते हैं। इसके बाद इसे गाढ़ी मसालेदार ग्रेवी में कुछ देर पकाया जाता है।

मेंढक का मांस : इसे बनाने के लिए मेंढक को उबालने के बाद खास मसालों (अदरक, लहसुन और मिर्च अनिवार्य) में लपेटा जाता है। मेरिनेट होने के बाद इस ड्राई होने तक फ्राई किया जाता है। इस फ्राई मेंढक को सलाद और पालक के साथ पकाया जाता है।

गलहो : यह एक तरह की खिचड़ी है जिसे चावल, सब्जियों और मांस से बनाया जाता है। लोग इसमें स्मोक्ड पोर्क और मौसमी साग को मिलाना ज्यादा पसन्द करते हैं। इसे अदरक और लहसुन से गार्निस किया जाता है।

पोर्क करी : इसे बनाने के लिए सुअर के मांस को बांस या सोयाबीन के विभिन्न प्रकार के किण्वित अंकुरों, क्यूब्ड प्याज और हरी मिर्च समेत कई तरह के मसालों का उपयोग किया जाता है।इसे प्रायः चावल और मछली के पेस्ट के साथ परोसा जाता है।

अनीशी : इसे बनाने के लिए कोलोकेशिया (अरबी) के तने और पत्तियों को ताजा पोर्क अथवा स्मोक्ड पोर्क के साथ पकाया जाता है। इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के स्टू बनाने और भोजन में अतिरिक्त स्वाद जोड़ने के लिए किया जाता है। आओ जनजाति की यह मनपन्द डिश अब पूरे राज्य में खायी जाती है।

अमरुसू :

अमरुसू
अमरुसू

चावल, चिकन, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन और अन्य मसालों से मिलकर तैयार होने वाली अमरुसू एओ जनजाति की सिग्नेचर डिश है। हालांकि धीरे-धीरे यह पर्यटकों में भी लोकप्रिय हो रही है। खासकर उत्तर और पश्चिम भारत से आने वाले सैलानी इसे खाना पसन्द करते हैं।

स्टीम्ड हॉर्नेट : हॉर्नेट का स्टीम्ड लार्वा नागालैण्ड का एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है। यहां तक कि बहुत से लोग इसे फेरी लगाकर भी बेचते हैं।

काली दाल : यह दरअसल छिलके वाली उड़द की दाल है। इसे  बनाने के लिए दाल को चीरा लगी हरी मिर्च और नमक डाल कर उबाला जाता है। इसके बाद इसमें राई, लाल मिर्च, तेजपत्ता और पंच पोरेन का तड़का लगाया जाता है।

हिंकेजवु :

हिंकेजवु
हिंकेजवु

इसे अरबी, पत्तागोभी, पालक, गाजर, सरसों के पत्तों और कई तरह की फलियों से तैयार किया जाता है। इस पूरी सामग्री को नमक मिले पानी में उबाला जाता है। इसे मांसाहारी थाली में बीच-बीच में स्वाद बदलने के लिए परोसा जाता है। इसके बिना भोजन को अधूरा माना जाता है।

जुथो :

जुथो
जुथो

यह चावल से तैयार की जाने वाली एक तरह की देसी बियर है। यह नागालैण्ड समेत पूरे उत्तर-पूर्व का लोकप्रिय पेय है। इसके बिना हर जश्न अधूरा माना जाता है।

ब्लैक स्टिकी राइस पुडिंग :

ब्लैक स्टिकी राइस पुडिंग
ब्लैक स्टिकी राइस पुडिंग

यह नागालैण्ड की सबसे लोकप्रिय मिठाई है। विशेष प्रकार के चावलों और चीनी से तैयार किए जाने वाले इस व्यंजन को विभिन्न प्रकार के मेवे और केसर एक अनोखा स्वाद और सुगन्ध देते हैं।

12 thought on “नागालैण्ड : मांसाहार की बहार”
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