सहयाद्रि पर्वतमाला पर समुद्र की सतह से 586 मीटर की ऊंचाई पर बसा इगतपुरी (Igatpuri) नाशिक जिले में है। राष्ट्रीय राजमार्ग 160 पर ठाणे और शाहपुर होते हुए इस भव्य हिल स्टेशन तक पहुंचने में हमें करीब ढाई घण्टे लगे। लुभावने और मनोरम परिदृश्यों के कारण समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। साहसिक गतिविधियों के शौकीन लोगों को यहां के ट्रैक मानो चुनौती देते हैं।
न्यूज हवेली नेटवर्क
Igatpuri : मुम्बई में रहते हुई एक दशक हो चुका है। कामकाजी व्यस्तता के कारण इस दीर्घ अवधि में ज्यादा घूम नहीं पाया हूं। हालांकि मित्रों के साथ चाय की चुस्कियों के बीच महाराष्ट्र की प्राकृतिक सुन्दरता के बारे में काफी सुना था पर हिल स्टेशनों के नाम पर खण्डाला और लोनावाला जाना ही हो पाया था। इस बार लम्बी छुट्टियां लीं और निकल पड़े अनदेखे पर्वतीय पर्यटन स्थलों की सैर पर। हमारी सूची में पहले स्थान पर था इगतपुरी (Igatpuri)।
सहयाद्रि पर्वतमाला पर समुद्र की सतह से 586 मीटर की ऊंचाई पर बसा इगतपुरी (Igatpuri) नाशिक जिले में है। राष्ट्रीय राजमार्ग 160 पर ठाणे और शाहपुर होते हुए इस भव्य हिल स्टेशन तक पहुंचने में हमें करीब ढाई घण्टे लगे। लुभावने और मनोरम परिदृश्यों के कारण समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। साहसिक गतिविधियों के शौकीन लोगों को यहां के ट्रैक मानो चुनौती देते हैं। इनमें से त्रिंगलवाड़ी और कुलंगगढ़ ट्रैक को सबसे कठिन माना जाता है। (gatpuri: Challenging tracks of weekend destination of Maharashtra)
खण्डाला और लोनावाला में पर्यटकों की भीड़ बढ़ने के साथ ही इगतपुरी (Igatpuri) मुम्बई और पुणे के लोगों के लिए लोकप्रिय वीकेन्ड डेस्टिनेशन के रूप में उभऱा है। शनिवार और रविवार को यहां काफी भीड़ रहती है।
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इगतपुरी के प्रमुख दर्शनीय स्थल (Major tourist places of Igatpuri)
त्रिंगलवाड़ी किला :
समुद्र की सतह से 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित त्रिंगलवाड़ी किला इगतपुरी (Igatpuri) के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में से एक है। दसवीं शताब्दी में बनाया गया यह किला इगतपुरी से करीब सात किलोमीटर दूर है और अब खण्डहर जैसा हो गया है। यह लम्बी पैदल यात्रा और ट्रैकिंग करने वालों के बीच लोकप्रिय है। 1636 में महुलीगढ़े में हार के बाद शाहजी (छत्रपति शिवाजी के पिता) को इसे मुगलों को सौंपना पड़ा। यह ज्ञात नहीं है कि शिवाजी ने इस किले पर कब अधिकार किया लेकिन दस्तावेजों से इतना अवश्य पता चलता है कि 1688 में इस किले को मुगलों ने जीत लिया था। यह उन 16 किलों में से एक है जिन्हें 1818 में त्र्यम्बकगढ़ किले के पतन के बाद अंग्रेजों को सौंप दिया गया था।
विहिगांव जलप्रपात :
हरियाली और सुरम्य वातावरण में स्थित विहिगांव जलप्रपात प्रकृति प्रेमियों और एकान्त की चाह रखने वाले पर्यटकों के लिए स्वर्ग के समान है। यहां जलधारा 120 फिट उपर से गिरती है। शाहरुख खान की फिल्म अशोका का एक गाना यहां फिल्माया गया था। इसके बाद से इसे अशोक झरना भी कहा जाने लगा है। यह इगतपुरी से करीब 13 किलोमीटर पड़ता है।
भवाली दामो : इगतपुरी के भवाली इलाके में भाम नदी पर बने इस बांध की ऊंचाई 111.5 फीट और लम्बाई 5,090 फीट है। यहां की प्राकृतिक सुन्दरता इतनी मोहक है कि पर्यटक खिंचे चले आते हैं। मानसून के दौरान यह बांध पानी से लबालब भर जाने पर और विशाल लगने लगता है। अक्टूबर और नवम्बर में यहां का यात्रा करना अत्यन्त सुखद है।
संधान घाटी : सह्याद्री पर्वतमाला में इगतपुरी के पास भण्डारदरा में स्थिति इस घाटी को “छाया की घाटी” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि सूर्य की किरणें इसके ज्यादातर हिस्सों तक नहीं पहुंच पाती हैं। इस घाटी को “महाराष्ट्र की ग्रैण्ड कैन्यन” भी कहा जाता है और यह सह्याद्रि में सबसे चुनौतीपूर्ण और आनन्ददायक ट्रैक में से एक है। यह घाटी अलंग, मदन, कुलंग, अजोबा, रतंगा आदि पर्वतों से घिरी हुई है। नवम्बर से फरवरी के बीच का समय यहां ट्रैकिंग के लिए आदर्श माना जाता है।
कसारा घाट :

समुद्र तल से 585 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कसारा घाटी इगतपुरी से करीब 24 किलोमीटर दूर है। यह एक सुरम्य और चुनौतीपूर्ण स्थान है। यह देश के पूर्वी और पश्चिमी भागों को जोड़ने वाली सड़कों और रेल ट्रैक दोनों के लिए एक कनेक्शन बिन्दु के रूप में कार्य करता है।
भाटसा घाटी :

यह सुरम्य घाटी मुम्बई-इगतपुरी मार्ग पर इगतपुरी से कुछ पहले है। थाल घाट के अन्त में स्थित यह घाटी भाटसा नदी के बेसिन में है। यहां की पहाड़ियां, जंगल, चमकीले पत्ते और नदी इसे और सुन्दर बना देते हैं। यहां घाट देवी को समर्पित घाटन देवी मन्दिर भी है। इस घाटी की यात्रा के लिए मानसून सबसे अच्छा समय है लेकिन इस दौरान छाता और रेनकोट अवश्य साथ रखें।
ऊंट घाटी :

इगतपुरी के सबसे सुन्दर और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक ऊंट घाटी भातसा नदी घाटी के पास ही है। इसके मुख्य आकर्षण वे पांच प्रपात हैं जिनकी जलधाराएं एक के बाद एक नीचे चट्टानों पर गिरती हैं। मानसून के दौरान इनका सौन्दर्य निखार पर होता है। कहा जाता है कि ऊंट घाटी घूमे बिना इगतपुरी की यात्रा पूरी नहीं होती है।
कलसुबाई शिखर :

अगर आप इगतपुरी में एक से दो दिन ज्यादा रुक सकते हैं तो 1,646 मीटर ऊंचे कलसुबाई शिखर पर ट्रैकिंग अवश्य करें। यह महाराष्ट्र की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों में से एक है। इगतपुरी से 30 किलोमीटर दूर स्थित इस शिखर को “एवरेस्ट ऑफ़ द महाराष्ट्र” भी कहा जाता है। इसके तल में स्थित बाड़ी गांव से ट्रैक की शुरुआत होती है। इसे दो खण्डों में विभाजित किया जा सकता है। पहला खण्ड बारी गांव से है जो खेतों, घास के मैदानों और एक छोटे वन खण्ड से होकर गुजरता है। दूसरा खण्ड चुनौतीपूर्ण है जिसमें कई सीढ़ियां हैं। कुल मिलाकर इस ट्रैक की चढ़ाई काफी कठिन है। यदि आप ट्रैकिंग करते हुए शिखर तक नहीं जाना चाहते तो कुछ दूर चलकर ही इस ट्रैक की चुनौतियों को अनुभव कर सकते हैं। आप चाहें तो कलसुबाई शिखर के आसपास की पहाड़ियों पर भी ट्रैकिंग कर सकते हैं। कलसुबाई शिखर पर इसी नाम की देवी का एक मन्दिर है जहां नवरात्र, दीपावली और होली पर मेला लगता है।
विपश्यना केन्द्र : एसएन गोयनका द्वारा स्थापित धम्म गिरि ध्यान केन्द्र को ही विपश्यना केन्द्र कहा जाता है जो दरअसल एक मठ है। यहां पर बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित ध्यान कक्षाएं लगती हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े विपश्यना केन्द्रों में से एक है और इसे अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। यह भारत सहित दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां जाने का सबसे अच्छा समय सुबह 09:30 बजे से शाम 04:30 बजे के बीच का है। यहां के लिए इगतपुरी रेलवे स्टेशन से टैक्सी और ऑटो मिलते हैं।
म्यांमार गेट : विपश्यना ध्यान केन्द्र के प्रवेश द्वार को ही म्यांमार गेट के नाम से जाना जाता है। इसका निर्माण थाई वास्तुकला के अनुरूप किया गया है। इसके अलंकृत स्तम्भों की शोभ देखते ही बनती है।
कुलंगगढ़ :

यह एक पहाड़ी किला है जो इगतपुरी से 17.8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। समुद्र की सतह से 4,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दुर्ग महाराष्ट्र का सबसे ऊंचा पहाड़ी किला है। इसके अब खण्डहर ही बचे हैं। किले के प्रवेश द्वार के पास एक बड़ी गुफा है। यहां पानी के बड़े-बडे टैंक और कुण्ड हैं। इस किले से आसपास के विहंगम दृश्य दिखते ही बनते हैं।
बिटांगढ़ :

यह नासिक क्षेत्र में स्थित इस तरह के कई किलों में से एक है और समुद्र की सतह से लगभग 3,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह इगतपुरी के पूर्व में लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है। इसकी चढ़ाई पर एक गुफा और चोटी पर कई जल भण्डारण हौज हैं। चोटी का पठार लम्बी-लम्बी घासों से आच्छादित है। बिटांगढ़ ट्रैक को काफी कठिन माना जाता है।
अमृतेश्वर मन्दिर :

भगवान शिव को समर्पित इस मन्दिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में शिलाहर वंश के राजा झांझ ने करवाया था। हेमाडपन्थी स्थापत्य शैली के इस मन्दिर को बनाने के लिए काले पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। यह आर्थर हिल झील के दूसरी ओर स्थित है। यदि आप भण्डारदरा से नाव से जाते हैं तो यह रतनवाड़ी गांव की ओर केवल 10 किलोमीटर पड़ता है। सड़क मार्ग से यह भण्डारदरा से 12 किमी दूर है। इसका रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया जाता है। विल्सन बांध, आर्थर हिल झील, कलसुबाई चोटी, इगतपुरी और अशोक जलप्रपात इसके आसपास के घूमने योग्य स्थान हैं।
घाटांदेवी मन्दिर :

इगतपुरी रेलवे स्टेशन के करीब एक भव्य घाटी में स्थित है यह मन्दिर घाटन देवी को समर्पित है जिन्हें पहाड़ियों का रक्षक माना जाता है। यहां की भव्य पृष्ठभूमि और शान्त वातावरण ने इसको इगतपुरी के प्रमुख धार्मिक स्थल के साथ ही एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण बना दिया है।
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कब जायें इगतपुरी (When to go to Igatpuri)
इगतपुरी जाने का सबसे अच्छा समय मानसून और सर्दी का होता है। प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकर्स के लिए मानसून का समय सबसे अच्छा है। दरअसल, जून से अक्टूबर के बीच इगतपुरी पूरी तरह खिल उठती है। घास के मैदान और फूलों से लदे पेड़-पौधे पर्यटकों का स्वागत करते हैं। नवम्बर से फरवरी के बीच यहां का मौसम काफी सुहावना होता है। मई और जून में यहां जाने का सलाह हम आपको नहीं देंगे।
ऐसे पहुंचें इगतपुरी (How to reach Igatpuri)
वायु मार्ग : निकटतम हवाई अड्डा मुम्बई का छत्रपति शिवाजी महाराज इण्टरनेशनल एयरपोर्ट करीब 127 किलोमीटर पड़ता है।
रेल मार्ग : मुम्बई, वाराणसी, हावड़ा, अमृतसर, प्रयागराज, पटना, भोपाल समेत देश के कई प्रमुख शहरों से इगतपुरी के लिए ट्रेन मिलती हैं।
सड़क मार्ग : इगतपुरी मुम्बई से करीब 121 किमी, नाशिक से 46, नागपुर से 649, पुणे से 238 और महाबलेश्वर से लगभग 354 किलोमीटर पड़ता है। इन सभी स्थानों स्थानों से यहां के लिए सीधी और कनेक्टिव बस सेवा है। महाराष्ट्र में टैक्सी और कैब सेवा भी काफी अच्छी है।



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